क्यों नाम दूँ उसे बेवफ़ा का , वो तो व

क्यों नाम दूँ उसे बेवफ़ा का ,

वो तो वक़्त था ,

जिसे मेरी हँसी

देखी नही गयी !!

मेरे कलम से लफ्ज़ खो गए सायद


मेरे कलम से लफ्ज़ खो गए सायद
आज वो भी बेवफा हो गाए सायद
जब नींद खुली तो पलकों में पानी था
मेरे ख्वाब मुझपे रो गाए सायद


दर्द ही सही मेरे इश्क़ का इनाम तो आया,

दर्द ही सही मेरे इश्क़ का इनाम तो आया,

खाली ही सही होठों तक जाम तो आया,

मैं हूँ बेवफा सबको बताया उसने,

यूँ ही सही चलो उसके लबों पर मेरा नाम तो आया .

दुनियाँ को इसका चेहरा दिखाना पड़ा मुझे,

दुनियाँ को इसका चेहरा दिखाना पड़ा मुझे,

पर्दा जो दरमियां था हटाना पड़ा मुझे,

रुसवाईयों के खौफ से महफिल में आज,

फिर इस बेवफा से हाथ मिलाना पड़ा मुझे .

माना कि मोहब्बत की ये भी एक हकीकत है फिर

माना कि मोहब्बत की ये भी एक हकीकत है फिर भी,

जितना तुम बदले हो उतना भी नहीं बदला जाता।

मोहब्बत का नतीजा दुनिया में हमने बुरा

मोहब्बत का नतीजा दुनिया में हमने बुरा देखा


जिन्हे दावा था वफा का उन्हें भी हमने बेवफा देखा