दिल थाम कर जाते हैं हम राहे-वफा से,

खौफ लगता है हमें तेरी आंखों की खता से,

जितना भी मुनासिब था हमने सहा हुजूर,

अब दर्द भी लुट जाए तुम्हारी दुआ से।



हम तो बुरे नहीं हैं तो अच्छे ही कहाँ हैं,

दुश्मन से जा मिले हैं मुहब्बत के गुमां से,

वो दफ्न ही कर देते हमें आगोश में लेकर,

ये मौत भी बेहतर है जुदाई की सजा से।

दिल से हमें पुकारा ना करो,

यूँ आँखों से इशारा ना करो,

तुमसे दूर हैं मजबूरी है हमारी,

तन्हाई में हमें यूँ तड़पाया ना करो।

हर एक बात पर वक़्त का तकाजा हुआ,

हर एक याद पर दिल का दर्द ताजा हुआ,

सुना करते थे ग़ज़लों में जुदाई की बातें,

खुद पे बीती तो हकीकत का अंदाजा हुआ।

मजबूरी में जब कोई किसी से जुदा होता है,

ये तो ज़रूरी नहीं कि वो बेवफ़ा होता है,

देकर वो आपकी आँखों में जुदाई के आँसू,

तन्हाई में वो आपसे भी ज्यादा रोता है।

तुझे चाहा तो बहुत इजहार न कर सके,

कट गई उम्र किसी से प्यार न कर सके,

तूने माँगा भी तो अपनी जुदाई माँगी,

और हम थे कि तुझे इंकार न कर सके।

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