याद में तेरी आँहें भरता है कोई, हर सा

याद में तेरी आँहें भरता है कोई,

हर सांस के साथ तुझे याद करता है कोई,

मौत तो सचाई है आनी ही है,

लेकिन तेरी जुदाई में हर रोज़ मरता है कोई।

हो जुदाई का सबब कुछ भी मगर, हम उसे अप

हो जुदाई का सबब कुछ भी मगर,

हम उसे अपनी खता कहते हैं,

वो तो साँसों में बसी है मेरे,

जाने क्यों लोग मुझसे जुदा कहते हैं

बेवफा वक़्त था..? तुम थे..? या मुक

बेवफा वक़्त था..?

तुम थे..?

या मुकद्दर था मेरा..?

बात इतनी ही है कि अंजाम जुदाई निकला ।

रब किसी को किसी पर फ़िदा न करे, करे त

रब किसी को किसी पर फ़िदा न करे,

करे तो क़यामत तक जुदा न करे,

ये माना की कोई मरता नहीं जुदाई में,

लेकिन जी भी तो नहीं पाता तन्हाई में।

इतना बेताब न हो मुझसे बिछड़ने के लिए,

इतना बेताब न हो मुझसे बिछड़ने के लिए,

तुझे आँखों से नहीं मेरे दिल से जुदा होना है।

हमें ये मोहब्बत किस मोड़ पे ले आई, दिल

हमें ये मोहब्बत किस मोड़ पे ले आई,

दिल में दर्द है और ज़माने में रुसवाई,

कटता है हर एक पल सौ बरस के बराबर,

अब मार ही डालेगी मुझे तेरी जुदाई।