कितना भी चाहो ना भूल पाओगे हमें जितनी दूर जाओगे नजदीक पाओगे हमें मिटा सकते हो तो मिटा दो यादें मेरी मगर क्या सांसो से भी जुदा कर पाओगे हमें

हो जुदाई का शबाब कुछ भी मगर हम उसे अपनी खता कहते है वो तो सांसो में ढली है मेरे जाने क्यों लोग उसे मुझसे जुदा कहते है ..open
बिछड़ कर आपसे हमको ख़ुशी अच्छी नहीं लगती लबों पर ये बनावट की हंसी अच्छी नहीं लगती कभी तो खूब लगती थी मगर ये सोचती हूँ अब की मुझको क्यों मेरी ये जिंदगी अच्छी नहीं लगती ..open

आपकी याद दिल को बेक़रार करती है नजर तलाश आपको बार बार करती है गिला नहीं जो हम है दूर आपसे हमारी तो जुदाई भी आपसे प्यार करती है

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खूबसूरत है जिंदगी ख्वाब की तरह जाने कब टूट जाये कांच की तरह मुझे ना भूलना किसी बात की तरह अपने दिल में ही रखना खूबसूरत याद की तरह ..open
लोग लेते है यूँ ही शम्मा और परवाने का नाम कुछ नहीं है इस जहाँ में ग़ुम के अफ़साने का नाम ..open
ना वो आये और ना कोई उनका पैगाम आया इंतजार में आपने तड़पा कर हमें है रुलाया हमसे खता हुई अगर कोई तुम बता तो देते ऐसी भी क्या नाराजगी थी जो हमें आपने भुलाया ..open

जुबान खामोश आँखों में नमी होगी यही बस एक दास्ताँ जिंदगी की होगी भरने को तो हर जख्म भर जायेगा लेकिन कैसे भरेगी वो जगह जहाँ उसकी कमी होगी ..open
तमन्ना से नहीं तन्हाई से डरते है प्यार से नहीं रुस्वाई से डरते है मिलने की चाहत तो बहुत है मगर मिलन के बाद की जुदाई से डरते है ..open
जाने किस बात की मुझको सजा देता है मेरी हंसती हुई आँखों को रुला देता है एक मुद्दत से खबर भी नहीं तेरी कोई इस तरह भी क्या अपने प्यार को भुला देता है ..open

किसी से जुदा होना इतना आसान होता तो, जिस्म से रूह को लेने फ़रिश्ते नहीं आते

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तुम्हारा दुःख हम सह नहीं सकते भरी महफ़िल में कुछ कह नहीं सकते हमारे गिरते हुए आंसूओ को पढ़ कर देखो वो भी कहते है की हम आपके बिना रह नहीं सकते

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उदास ना बैठो फ़िज़ा तंग करेगी गुजरे हुए लम्हों की सजा तंग करेगी किसी को ना लाओ दिल के इतना करीब क्यों की उसके जाने के बाद उसकी हर अदा तंग करेगी ..open

.मौत ने तो नहीं जिंदगी ने बहुत सताया है तुझे जितना भूले तू उतना ही याद आया है तू क्यों इस बात को अक्सर भूल जाता है बरसों मिन्नतों के बाद तुझे पाया है ..open

ये कैसी जुदाई है जिसने हमें शायर बना दिया ये कैसा गम है जिसने हमें बेबस बना दिया सोचा नहीं था जुदा हो जाओगे हमसे कभी करते भी क्या जब आप ने ही गैर बना दिया

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कैसे गुजरती है मेरी हर एक शाम तेरे बगैर अगर तू देख ले तो कभी तन्हा ना छोड़ती मुझे ..open

अब कौन से मौसम से कोई आस लगाये बरसात में भी याद ना जब उनको हम आये ..open

कितना भी चाहो ना भूल पाओगे हमें जितनी दूर जाओगे नजदीक पाओगे हमें मिटा सकते हो तो मिटा दो यादें मेरी मगर क्या सांसो से भी जुदा कर पाओगे हमें

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दिल तो करता है जिंदगी को किसी कातिल के हवाले कर दू जुदाई में यूँ रोज रोज का मरना मुझे अच्छा नहीं लगता ..open

ऐ जिंदगी काश तू ही रूठ जाती मुझसे ये रूठे हुए लोग मुझसे मनाये नहीं जाते ..open
मजबूरी में जब कोई किसी से जुदा होता है, ये तो ज़रूरी नहीं कि वो बेवफ़ा होता है, देकर वो आपकी आँखों में जुदाई के आँसू, तन्हाई में वो आपसे भी ज्यादा रोता है। ..open

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