लोग लेते है यूँ ही शम्मा और परवाने का नाम कुछ नहीं है इस जहाँ में ग़ुम के अफ़साने का नाम
आज जरुरत है जिसकी वो पास नहीं है अब उनके दिल में वो एहसास नहीं है तड़पते है दो पल बात करने को शायद अब वक़्त हमारे लिए उनके पास नहीं है ..open
सजा ना दो मुझे बेक़सूर हूँ मैं थाम लो मुझको गमो से चूर हूँ मैं तेरी दुरी ने कर दिया है पागल सा मुझे और लोगो का कहना है की मगरूर हूँ मैं ..open
दिल तो करता है जिंदगी को किसी कातिल के हवाले कर दू जुदाई में यूँ रोज रोज का मरना मुझे अच्छा नहीं लगता ..open

कैसे गुजरती है मेरी हर एक शाम तेरे बगैर अगर तू देख ले तो कभी तन्हा ना छोड़ती मुझे ..open
जब छोटे थे हम तो जोर से रोते थे जो पसंद होता था उसे पाने के लिए आज बड़े है तो चुपके से रोते है जो पसंद है उसे भुलाने के लिए ..open

आपकी याद दिल को बेक़रार करती है नजर तलाश आपको बार बार करती है गिला नहीं जो हम है दूर आपसे हमारी तो जुदाई भी आपसे प्यार करती है

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.मौत ने तो नहीं जिंदगी ने बहुत सताया है तुझे जितना भूले तू उतना ही याद आया है तू क्यों इस बात को अक्सर भूल जाता है बरसों मिन्नतों के बाद तुझे पाया है ..open
जाने किस बात की मुझको सजा देता है मेरी हंसती हुई आँखों को रुला देता है एक मुद्दत से खबर भी नहीं तेरी कोई इस तरह भी क्या अपने प्यार को भुला देता है ..open
ऐ जिंदगी काश तू ही रूठ जाती मुझसे ये रूठे हुए लोग मुझसे मनाये नहीं जाते ..open

कितना भी चाहो ना भूल पाओगे हमें जितनी दूर जाओगे नजदीक पाओगे हमें मिटा सकते हो तो मिटा दो यादें मेरी मगर क्या सांसो से भी जुदा कर पाओगे हमें

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ये कैसी जुदाई है जिसने हमें शायर बना दिया ये कैसा गम है जिसने हमें बेबस बना दिया सोचा नहीं था जुदा हो जाओगे हमसे कभी करते भी क्या जब आप ने ही गैर बना दिया

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अब कौन से मौसम से कोई आस लगाये बरसात में भी याद ना जब उनको हम आये ..open

भूले है रफ्ता रफ्ता उन्हें मुद्दतों में हम किश्तों में खुदखुशी का मज़ा हमसे पूछिये ..open

किसी से जुदा होना इतना आसान होता तो, जिस्म से रूह को लेने फ़रिश्ते नहीं आते

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तुम्हारा दुःख हम सह नहीं सकते भरी महफ़िल में कुछ कह नहीं सकते हमारे गिरते हुए आंसूओ को पढ़ कर देखो वो भी कहते है की हम आपके बिना रह नहीं सकते

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मजबूरी में जब कोई किसी से जुदा होता है, ये तो ज़रूरी नहीं कि वो बेवफ़ा होता है, देकर वो आपकी आँखों में जुदाई के आँसू, तन्हाई में वो आपसे भी ज्यादा रोता है। ..open
ना वो आये और ना कोई उनका पैगाम आया इंतजार में आपने तड़पा कर हमें है रुलाया हमसे खता हुई अगर कोई तुम बता तो देते ऐसी भी क्या नाराजगी थी जो हमें आपने भुलाया ..open
हो जुदाई का शबाब कुछ भी मगर हम उसे अपनी खता कहते है वो तो सांसो में ढली है मेरे जाने क्यों लोग उसे मुझसे जुदा कहते है ..open

जुबान खामोश आँखों में नमी होगी यही बस एक दास्ताँ जिंदगी की होगी भरने को तो हर जख्म भर जायेगा लेकिन कैसे भरेगी वो जगह जहाँ उसकी कमी होगी ..open
बिछड़ कर आपसे हमको ख़ुशी अच्छी नहीं लगती लबों पर ये बनावट की हंसी अच्छी नहीं लगती कभी तो खूब लगती थी मगर ये सोचती हूँ अब की मुझको क्यों मेरी ये जिंदगी अच्छी नहीं लगती ..open

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