ना वो आये और ना कोई उनका पैगाम आया इंतजार में आपने तड़पा कर हमें है रुलाया हमसे खता हुई अगर कोई तुम बता तो देते ऐसी भी क्या नाराजगी थी जो हमें आपने भुलाया
कैसे गुजरती है मेरी हर एक शाम तेरे बगैर अगर तू देख ले तो कभी तन्हा ना छोड़ती मुझे ..open
उदास ना बैठो फ़िज़ा तंग करेगी गुजरे हुए लम्हों की सजा तंग करेगी किसी को ना लाओ दिल के इतना करीब क्यों की उसके जाने के बाद उसकी हर अदा तंग करेगी ..open
तमन्ना से नहीं तन्हाई से डरते है प्यार से नहीं रुस्वाई से डरते है मिलने की चाहत तो बहुत है मगर मिलन के बाद की जुदाई से डरते है ..open

ये कैसी जुदाई है जिसने हमें शायर बना दिया ये कैसा गम है जिसने हमें बेबस बना दिया सोचा नहीं था जुदा हो जाओगे हमसे कभी करते भी क्या जब आप ने ही गैर बना दिया

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तुम्हारा दुःख हम सह नहीं सकते भरी महफ़िल में कुछ कह नहीं सकते हमारे गिरते हुए आंसूओ को पढ़ कर देखो वो भी कहते है की हम आपके बिना रह नहीं सकते

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अब कौन से मौसम से कोई आस लगाये बरसात में भी याद ना जब उनको हम आये ..open

आपकी याद दिल को बेक़रार करती है नजर तलाश आपको बार बार करती है गिला नहीं जो हम है दूर आपसे हमारी तो जुदाई भी आपसे प्यार करती है

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खूबसूरत है जिंदगी ख्वाब की तरह जाने कब टूट जाये कांच की तरह मुझे ना भूलना किसी बात की तरह अपने दिल में ही रखना खूबसूरत याद की तरह ..open
आज जरुरत है जिसकी वो पास नहीं है अब उनके दिल में वो एहसास नहीं है तड़पते है दो पल बात करने को शायद अब वक़्त हमारे लिए उनके पास नहीं है ..open

जब छोटे थे हम तो जोर से रोते थे जो पसंद होता था उसे पाने के लिए आज बड़े है तो चुपके से रोते है जो पसंद है उसे भुलाने के लिए ..open
जाने किस बात की मुझको सजा देता है मेरी हंसती हुई आँखों को रुला देता है एक मुद्दत से खबर भी नहीं तेरी कोई इस तरह भी क्या अपने प्यार को भुला देता है ..open
कट ही गयी जुदाई भी कब ये हुआ की मर गए तेरे भी दिन गुजर गए मेरे भी दिन गुजर गए ..open

लोग लेते है यूँ ही शम्मा और परवाने का नाम कुछ नहीं है इस जहाँ में ग़ुम के अफ़साने का नाम ..open
भूले है रफ्ता रफ्ता उन्हें मुद्दतों में हम किश्तों में खुदखुशी का मज़ा हमसे पूछिये ..open
ना वो आये और ना कोई उनका पैगाम आया इंतजार में आपने तड़पा कर हमें है रुलाया हमसे खता हुई अगर कोई तुम बता तो देते ऐसी भी क्या नाराजगी थी जो हमें आपने भुलाया ..open

दिल तो करता है जिंदगी को किसी कातिल के हवाले कर दू जुदाई में यूँ रोज रोज का मरना मुझे अच्छा नहीं लगता ..open
.मौत ने तो नहीं जिंदगी ने बहुत सताया है तुझे जितना भूले तू उतना ही याद आया है तू क्यों इस बात को अक्सर भूल जाता है बरसों मिन्नतों के बाद तुझे पाया है ..open

किसी से जुदा होना इतना आसान होता तो, जिस्म से रूह को लेने फ़रिश्ते नहीं आते

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जुबान खामोश आँखों में नमी होगी यही बस एक दास्ताँ जिंदगी की होगी भरने को तो हर जख्म भर जायेगा लेकिन कैसे भरेगी वो जगह जहाँ उसकी कमी होगी ..open
बिछड़ कर आपसे हमको ख़ुशी अच्छी नहीं लगती लबों पर ये बनावट की हंसी अच्छी नहीं लगती कभी तो खूब लगती थी मगर ये सोचती हूँ अब की मुझको क्यों मेरी ये जिंदगी अच्छी नहीं लगती ..open

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