सर्द रातों को सताती है जुदाई तेरी आग बुझती नहीं सीने में लगायी तेरी तुम जो कहते थे बिछड़ कर मैं सुकून पा लूंगा फिर क्यों रोती है मेरे दर पर तन्हाई तेरी
याद में तेरी आहे भरता है कोई हर सांस के

आओ किसी शब मुझे टूट के बिखरता देखो, मेरी रगों में ज़हर जुदाई का उतरता देखो, किस किस अदा से तुझे माँगा है खुदा से, आओ कभी मुझे सजदों में सिसकता देखो। ..open
पाया तुमको तो हम को लगा तुमको खो दिया हम दिल पे रोये और ये दिल हम पे रो दिया क्यों इसके फासले हमें मंजूर हो गए कितने हुए करीब की हम दूर हो गए ..open

तुझे चाहा तो बहुत इजहार न कर सके, कट गई उम्र किसी से प्यार न कर सके, तूने माँगा भी तो अपनी जुदाई माँगी, और हम थे कि तुझे इंकार न कर सके। ..open
हर एक बात पर वक़्त का तकाजा हुआ, हर एक याद पर दिल का दर्द ताजा हुआ, सुना करते थे ग़ज़लों में जुदाई की बातें, खुद पे बीती तो हकीकत का अंदाजा हुआ। ..open
जब तक मिले न थे जुदाई का था मलाल, अब ये मलाल है कि तमन्ना निकल गई। ..open

किसी से जुदा होना इतना आसान होता तो, रूह को जिस्म से लेने फ़रिश्ते नहीं आते। ..open
यह हम ही जानते हैं जुदाई के मोड़ पर, इस दिल का जो भी हाल तुझे देख कर हुआ। ..open
मजबूरी में जब कोई किसी से जुदा होता है, ये तो ज़रूरी नहीं कि वो बेवफ़ा होता है, देकर वो आपकी आँखों में जुदाई के आँसू, तन्हाई में वो आपसे भी ज्यादा रोता है। ..open

सोच नहीं सकते एक पल भी दूर रहना तुमसे अगर तू भूल जाये तो टूट कर बिखर जाऊँ मैं कभी जन्नत भी मिले मुझे तेरे प्यार के बदले मोहब्बत की कसम वहां भी मुकर जाऊँ मैं ..open
उस शख्स को बिछड़ने का सलीका नहीं आता, जाते जाते खुद को मेरे पास छोड़ गया...। ..open
सर्द रातों को सताती है जुदाई तेरी आग बुझती नहीं सीने में लगायी तेरी तुम जो कहते थे बिछड़ कर मैं सुकून पा लूंगा फिर क्यों रोती है मेरे दर पर तन्हाई तेरी ..open

हमने माँगा था साथ उनका वो जुदाई का गम दे गए हम उनकी यादो के सहारे ही जी लेते पर वो भूल जाने की कसम दे गए ..open
दिल थाम कर जाते हैं हम राहे-वफा से, खौफ लगता है हमें तेरी आंखों की खता से, जितना भी मुनासिब था हमने सहा हुजूर, अब दर्द भी लुट जाए तुम्हारी दुआ से। हम तो बुरे नहीं हैं तो अच्छे ही कहाँ हैं, दुश्मन से जा मिले हैं मुहब्बत के गुमां से, वो दफ्न ही कर देते हमें आगोश में लेकर, ये मौत भी बेहतर है जुदाई की सजा से। ..open
रब किसी को किसी पर फ़िदा न करे, करे तो क़यामत तक जुदा न करे, ये माना की कोई मरता नहीं जुदाई में, लेकिन जी भी तो नहीं पाता तन्हाई में। ..open

हमें ये मोहब्बत किस मोड़ पे ले आई, दिल में दर्द है और ज़माने में रुसवाई, कटता है हर एक पल सौ बरस के बराबर, अब मार ही डालेगी मुझे तेरी जुदाई। ..open
बेवफा वक़्त था..? तुम थे..? या मुकद्दर था मेरा..? बात इतनी ही है कि अंजाम जुदाई निकला । ..open
इतना बेताब न हो मुझसे बिछड़ने के लिए, तुझे आँखों से नहीं मेरे दिल से जुदा होना है। ..open

दिल से हमें पुकारा ना करो, यूँ आँखों से इशारा ना करो, तुमसे दूर हैं मजबूरी है हमारी, तन्हाई में हमें यूँ तड़पाया ना करो। ..open
हो जुदाई का सबब कुछ भी मगर, हम उसे अपनी खता कहते हैं, वो तो साँसों में बसी है मेरे, जाने क्यों लोग मुझसे जुदा कहते हैं ..open

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