तूने प्यार भी अजीब चीज बनाई है या रब

तेरे ही सामने तेरा हे बंदह राटा है तो किसी और के लिए
जो दिल के आईने में हो वही है प्यार के क़ाबिल वर्ण दीदार के क़ाबिल हर तस्वीर हुआ करती है ..open
आज कल उन बच्चों को भी प्यार के ग़म लगे होते हैं जिन्हें नज़र के काले वाले टीके भी पूरे नहीं लगे होते हैं ..open
तेरा प्यार पहन कर पूरी हूँ नहीं करना हार श्रृंगार पिया ..open

सफर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो, नजर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो, हजारों फूल देखे हैं इस गुलशन में मगर, खुशबू वहीं तक है जहाँ तक तुम हो.. ..open
ख़ुशी से दिल को आबाद करना ग़म से ज़िन्दगी को आज़ाद करना बस इतनी सी है गुज़ारिश हमारी सोने से पहले हम को भी याद करना ..open
सिर्फ इतना ही कहा है, प्यार है तुमसे; जज्बातों की कोई नुमाईश नहीं की, प्यार के बदले सिर्फ प्यार मांगती हूँ, रिश्ते की तो कोई गुज़ारिश ही नहीं की ..open

नजर" से दुर रहकर भी किसी की "सोच" मे रहना..♥ किसी के "पास" रहने का तरीका होतो ऐसा हो. ..open
इस प्यार का किस्सा क्या लिखना एक बैठक थी बर्खास्त हुयी ..open
लगा कर फूल होठो से उसने कहा चुपके से अगर यहा कोई नहीं होता तो फूल की जगह तुम होते !! ..open

काश होती तुझे मेरे दिल की खबर तुम साथ होते अगर ..open
इस प्यार का किस्सा क्या लिखना एक बैठक थी बर्खास्त हुयी ..open
मुहब्बत का इम्तिहान आसान नहीं! प्यार सिर्फ पाने का नाम नहीं! मुद्दतें बीत जाती हैं किसी के इंतज़ार में! ये सिर्फ पल-दो-पल का काम नहीं! ..open

सिर्फ याद बनकर न रह जाये प्यार मेरा कभी कभी कुछ वक़्त के लिए आया करो ..open
कोयल कूकी मौज-ए सबा पाऊँ में घुंघरू बांध लिए प्यार का नगमा छेड़ रहा है आज कोई शननई में ..open
मेरी आँखों के जादू से नावाकिफ़ हो तुम लोग मैं उसे पागल कर देता हूँ जिसपर मुझे प्यार आ जाये ..open

तुम साथ हो तो दुनियां अपनी सी लगती है ! वरना सीने मे सांसे भी पराई सी लगती है !! ..open
तूने प्यार भी अजीब चीज बनाई है या रब तेरे ही सामने तेरा हे बंदह राटा है तो किसी और के लिए ..open
जब ख़याल आया तो खयाल भी उनका आया जब आँखे बंद की ख्वाब भी उनका आया , सोचा याद कर लू किसी और को मगर होठ खुले तो नाम भी उनका आया. ..open

एक उम्र है जो तेरे बगैर गुजारनी है और एक लम्हा है जो तेरे बगैर गुज़रता नहीं ..open
अपने होंठों पर सजाना चाहती हूँ आ तुझे मैं गुनगुनाना चाहती हूँ कोई आँसू तेरे बाजूओं पर गिराकर बूँद को मोती बनाना चाहती हूँ थक गयी मैं करते-करते याद तुझको अब तुझे मैं याद आना चाहती हूँ आख़री हिचकी तेरे ज़ानों पे आये मौत भी मैं शायराना चाहती हूँ ..open

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